श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.32.31 
यदि वापि त्वरा तुभ्यं युद्धतृष्णासमावृता।
निपात्यास्मान् रणे युद्धमर्जुनेनोपयास्यसि॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे युद्ध के लिए तरसने वाले राक्षसराज! यदि तुम्हें युद्ध करने की जल्दी है, तो पहले युद्धभूमि में हम सबका वध करो। तभी तुम राजा अर्जुन के साथ युद्ध कर सकोगे॥31॥
 
O demon king, who is yearning for battle! If you are in a hurry to fight, then first kill us all on the battlefield. Only then will you be able to fight with King Arjun.'॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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