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ramayan 7.32.29-30h: जैसे कोई बाघ कामातुर होकर हथिनियों के बीच में खड़ा हुआ हाथीराज से युद्ध करना चाहता है, उसी प्रकार तुम भी स्त्रियों के सामने रमण करने को तत्पर राजा अर्जुन से युद्ध करने का साहस दिखा रहे हो।   |   ramayan सर्ग 7.32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  7.32.29-30h 
स्त्रीसमक्षगतं यत् त्वं योद्धुमुत्सहसे नृप॥ २९॥
वासितामध्यगं मत्तं शार्दूल इव कुञ्जरम्।
 
 
अनुवाद
जैसे कोई बाघ कामातुर होकर हथिनियों के बीच में खड़ा हुआ हाथीराज से युद्ध करना चाहता है, उसी प्रकार तुम भी स्त्रियों के सामने रमण करने को तत्पर राजा अर्जुन से युद्ध करने का साहस दिखा रहे हो।
 
Just as a tiger wants to fight with a king elephant standing in the midst of female elephants in lust, similarly you are showing courage to fight with King Arjuna who is ready to indulge in frolic in front of women.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)