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ramayan 7.32.18: हे दैत्यराज! यहाँ से कुछ ही दूरी पर साल वृक्ष के समान विशाल एक पुरुष है, जो बाँध के समान नर्मदा के जल को रोके हुए है और स्त्रियों के साथ क्रीड़ा कर रहा है॥18॥   |   ramayan सर्ग 7.32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.32.18 
बृहत्सालप्रतीकाश: कोऽप्यसौ राक्षसेश्वर।
नर्मदां रोधवद् रुद्‍ध्वा क्रीडापयति योषित:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे दैत्यराज! यहाँ से कुछ ही दूरी पर साल वृक्ष के समान विशाल एक पुरुष है, जो बाँध के समान नर्मदा के जल को रोके हुए है और स्त्रियों के साथ क्रीड़ा कर रहा है॥18॥
 
King of demons! Not far from here there is a man as huge as a sal tree, who is stopping the water of Narmada like a dam and is playing with women.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)