श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.32.17 
तमद्भुततरं दृष्ट्वा राक्षसौ शुकसारणौ।
संनिवृत्तावुपागम्य रावणं तमथोचतु:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उस परम अद्भुत दृश्य को देखकर शुक और सारण नामक राक्षस लौटकर रावण के पास गए और बोले-॥17॥
 
‘Beholding that most wonderful sight the demons Shuka and Saran returned and went to Ravana and said:॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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