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श्लोक 7.32.13  |
अर्धयोजनमात्रं तु गत्वा तौ रजनीचरौ।
पश्येतां पुरुषं तोये क्रीडन्तं सहयोषितम्॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| केवल आधा योजन ही आगे जाकर उन दोनों रात्रि-विहारियों ने एक पुरुष को जल में स्त्रियों के साथ क्रीड़ा करते देखा॥13॥ |
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| Having gone only half a Yojana, the two night-walkers saw a man playing with some women in the water.॥ 13॥ |
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