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ramayan 7.32.12: रावण की आज्ञा पाकर शुक और सारण दोनों वीर भाई आकाश मार्ग से पश्चिम दिशा की ओर चले॥12॥   |   ramayan सर्ग 7.32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.32.12 
तौ तु रावणसंदिष्टौ भ्रातरौ शुकसारणौ।
व्योमान्तरगतौ वीरौ प्रस्थितौ पश्चिमामुखौ॥ १२॥
 
 
अनुवाद
रावण की आज्ञा पाकर शुक और सारण दोनों वीर भाई आकाश मार्ग से पश्चिम दिशा की ओर चले॥12॥
 
After receiving the orders of Ravana, the two brave brothers Shuka and Saran proceeded towards the west through the sky. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)