| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना » श्लोक 1-2 |
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| | | | श्लोक 7.32.1-2  | नर्मदापुलिने यत्र राक्षसेन्द्र: स दारुण:।
पुष्पोपहारं कुरुते तस्माद् देशाददूरत:॥ १॥
अर्जुनो जयतां श्रेष्ठो माहिष्मत्या: पति: प्रभु:।
क्रीडते सह नारीभिर्नर्मदातोयमाश्रित:॥ २॥ | | | | | | अनुवाद | | नर्मदा नदी के तट पर जहाँ क्रूर राक्षसराज रावण भगवान महादेव को पुष्प अर्पित कर रहा था, उस स्थान से थोड़ी ही दूर पर महिष्मती के पराक्रमी राजा, समस्त विजयी योद्धाओं में श्रेष्ठ अर्जुन अपनी पत्नियों के साथ नर्मदा नदी के जल में क्रीड़ा कर रहे थे।॥1-2॥ | | | | On the banks of the Narmada River, where the cruel demon king Ravana was offering flowers to Lord Mahadev, a little distance away from that place, the mighty king of Mahishmati, the best of all victorious warriors, Arjuna, was playing in the waters of the Narmada River with his wives.॥ 1-2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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