श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 31: रावण का माहिष्मतीपुरी में जाना और वहाँ के राजा अर्जुन को न पाकर मन्त्रियों सहित उसका विन्ध्यगिरि के समीप नर्मदा में नहाकर भगवान् शिव की आराधना करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.31.8 
तुल्य आसीन्नृपस्तस्य प्रभावाद् वसुरेतस:।
अर्जुनो नाम यत्राग्नि: शरकुण्डेशय: सदा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उस अग्निदेव के प्रभाव से वहाँ अग्नि के समान तेजस्वी अर्जुन नाम का एक राजा राज्य करता था, जिसके राज्यकाल में अग्निदेव सदैव कुशास्त्रों से परिपूर्ण अग्निकुण्ड में निवास करते थे॥8॥
 
With the influence of that Agnidev, a king named Arjun, who was as bright as fire, ruled there, during whose reign the Agnidev always resided in the fire pit filled with Kushastrana. 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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