श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 31: रावण का माहिष्मतीपुरी में जाना और वहाँ के राजा अर्जुन को न पाकर मन्त्रियों सहित उसका विन्ध्यगिरि के समीप नर्मदा में नहाकर भगवान् शिव की आराधना करना  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  7.31.37-38h 
नर्मदापुलिने हृद्ये शुभ्राभ्रसदृशप्रभे॥ ३७॥
राक्षसैस्तु मुहूर्तेन कृत: पुष्पमयो गिरि:।
 
 
अनुवाद
'केवल दो घंटे में उन राक्षसों ने नर्मदा नदी के तट पर फूलों का एक पहाड़ खड़ा कर दिया, जो श्वेत बादलों के समान श्वेत और मनोरम था।
 
‘In just two hours those demons piled up a mountain of flowers on the banks of the Narmada river, which was as white and picturesque as the white clouds.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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