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श्लोक 7.31.34-35h  |
रावणेनैवमुक्तास्तु प्रहस्तशुकसारणा:॥ ३४॥
समहोदरधूम्राक्षा नर्मदां विजगाहिरे। |
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| अनुवाद |
| 'रावण के ऐसा कहने पर प्रहस्त, शुक, सारण, महोदर और धूम्राक्ष ने नर्मदा में स्नान किया। |
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| ‘Upon Ravana saying this, Prahasta, Shuka, Saran, Mahodar and Dhoomraksha bathed in the Narmada. |
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