श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 31: रावण का माहिष्मतीपुरी में जाना और वहाँ के राजा अर्जुन को न पाकर मन्त्रियों सहित उसका विन्ध्यगिरि के समीप नर्मदा में नहाकर भगवान् शिव की आराधना करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.31.32 
ते यूयमवगाहध्वं नर्मदां शर्मदां शुभाम्।
सार्वभौममुखा मत्ता गङ्गामिव महागजा:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
अतः तुम्हें इस शुभ नदी नर्मदा में स्नान करना चाहिए, जो सबको सुख देती है। जैसे सार्वभौम आदि महान दैत्य मतवाले होकर गंगा में डुबकी लगाते हैं।
 
‘Therefore, you should take a bath in this auspicious river Narmada which gives happiness to all. Just like the great giants like Sarvabhauma etc. take a dip in the Ganges in a drunken state.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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