श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 31: रावण का माहिष्मतीपुरी में जाना और वहाँ के राजा अर्जुन को न पाकर मन्त्रियों सहित उसका विन्ध्यगिरि के समीप नर्मदा में नहाकर भगवान् शिव की आराधना करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.31.30 
इयं वापि सरिच्छ्रेष्ठा नर्मदा नर्मवर्धिनी।
नक्रमीनविहंगोर्मि: सभयेवाङ्गना स्थिता॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
नदियों में श्रेष्ठ नर्मदा भी रमण और आनन्द की वृद्धि कर रही है। मगरमच्छ, मछलियाँ और जलपक्षी उसकी लहरों में क्रीड़ा कर रहे हैं और वह भयभीत स्त्री के समान पड़ी हुई है॥30॥
 
‘The Narmada, the best of the rivers, is also increasing the fun and enjoyment. Crocodiles, fishes and water birds are playing in its waves and it is lying like a frightened woman.॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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