श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 31: रावण का माहिष्मतीपुरी में जाना और वहाँ के राजा अर्जुन को न पाकर मन्त्रियों सहित उसका विन्ध्यगिरि के समीप नर्मदा में नहाकर भगवान् शिव की आराधना करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.31.3 
राजा वा राजमात्रो वा किं तदा नात्र कश्चन।
धर्षणं यत्र न प्राप्तो रावणो राक्षसेश्वर:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
क्या उस काल में कोई भी क्षत्रिय राजा या क्षत्रियेतर राजा इतना शक्तिशाली नहीं था, जिसके कारण राक्षसराज रावण को इस पृथ्वी पर पहुँचकर पराजय या अपमान का सामना न करना पड़ा?॥3॥
 
Was there no Kshatriya king or non-Kshatriya king powerful enough in those days, due to which the demon king Ravana did not have to face defeat or humiliation after reaching this earth?॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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