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श्लोक 7.31.3  |
राजा वा राजमात्रो वा किं तदा नात्र कश्चन।
धर्षणं यत्र न प्राप्तो रावणो राक्षसेश्वर:॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| क्या उस काल में कोई भी क्षत्रिय राजा या क्षत्रियेतर राजा इतना शक्तिशाली नहीं था, जिसके कारण राक्षसराज रावण को इस पृथ्वी पर पहुँचकर पराजय या अपमान का सामना न करना पड़ा?॥3॥ |
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| Was there no Kshatriya king or non-Kshatriya king powerful enough in those days, due to which the demon king Ravana did not have to face defeat or humiliation after reaching this earth?॥ 3॥ |
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