श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 31: रावण का माहिष्मतीपुरी में जाना और वहाँ के राजा अर्जुन को न पाकर मन्त्रियों सहित उसका विन्ध्यगिरि के समीप नर्मदा में नहाकर भगवान् शिव की आराधना करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.31.26 
प्रख्याय नर्मदां सोऽथ गङ्गेयमिति रावण:।
नर्मदादर्शने हर्षमाप्तवान् स दशानन:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'यह स्वयं गंगा हैं' कहकर रावण ने नर्मदा की स्तुति की और उन्हें देखकर प्रसन्न हुआ। 26.
 
Saying, 'This is Ganga herself', Ravana praised Narmada and felt delighted on seeing her. 26.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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