श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 31: रावण का माहिष्मतीपुरी में जाना और वहाँ के राजा अर्जुन को न पाकर मन्त्रियों सहित उसका विन्ध्यगिरि के समीप नर्मदा में नहाकर भगवान् शिव की आराधना करना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  7.31.13-14h 
श्रुत्वा विश्रवस: पुत्र: पौराणामर्जुनं गतम्॥ १३॥
अपसृत्यागतो विन्ध्यं हिमवत्संनिभं गिरिम्।
 
 
अनुवाद
ग्रामवासियों से राजा अर्जुन के चले जाने का समाचार सुनकर विश्रवा का पुत्र रावण वहाँ से चला गया और हिमालय के समान विशाल विन्ध्यगिरि पर आया। 13 1/2॥
 
Hearing from the villagers about the departure of King Arjun, Ravana, son of Vishrava, moved away from there and came to Vindhyagiri, huge like the Himalayas. 13 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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