श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 30: ब्रह्माजी का इन्द्रजित को वरदान देकर इन्द्र को उसकी कैद से छुड़ाना और उनके पूर्वकृत पापकर्म को याद दिलाकर उनसे वैष्णव- यज्ञ का अनुष्ठान करने के लिये कहना, उस यज्ञ को पूर्ण करके इन्द्र का स्वर्ग लोक में जाना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  7.30.46 
शापोत्सर्गाद्धि तस्येदं मुने: सर्वमुपस्थितम्।
तत् स्मर त्वं महाबाहो दुष्कृतं यत् त्वया कृतम् ॥ ४ ६॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! ये सब विपत्तियाँ उन गौतम ऋषि के शाप के कारण ही तुम पर आई हैं। अतः अपने किए हुए पापों का स्मरण करो॥ 46॥
 
‘Mahabaho! All these troubles have befallen you because of the curse of that sage Gautama. So remember the sins you committed.॥ 46॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd