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श्लोक 7.30.33  |
अयं तु भावो दुर्बुद्धे यस्त्वयेह प्रवर्तित:।
मानुषेष्वपि लोकेषु भविष्यति न संशय:॥ ३३॥ |
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| अनुवाद |
| हे मूर्ख! तेरे जैसे राजा के दोष से यह ईर्ष्या का भाव मनुष्यों के लोक में भी फैल जाएगा, जिसका आरम्भ तूने ही यहाँ किया है; इसमें संशय नहीं है॥33॥ |
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| You fool! Due to the fault of a king like you, this feeling of jealousy will spread in the world of humans as well, which you yourself have started here; there is no doubt about this. ॥ 33॥ |
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