श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 30: ब्रह्माजी का इन्द्रजित को वरदान देकर इन्द्र को उसकी कैद से छुड़ाना और उनके पूर्वकृत पापकर्म को याद दिलाकर उनसे वैष्णव- यज्ञ का अनुष्ठान करने के लिये कहना, उस यज्ञ को पूर्ण करके इन्द्र का स्वर्ग लोक में जाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.30.28 
स तया सह धर्मात्मा रमते स्म महामुनि:।
आसन्निराशा देवास्तु गौतमे दत्तया तया॥ २८॥
 
 
अनुवाद
'महामुनि गौतम उसके साथ सुखपूर्वक रहने लगे। जब अहिल्या गौतम को दे दी गई, तब देवता निराश हो गए॥ 28॥
 
‘The great sage Gautama started living happily with her. When Ahalya was given to Gautama, the gods became disappointed.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)