श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 30: ब्रह्माजी का इन्द्रजित को वरदान देकर इन्द्र को उसकी कैद से छुड़ाना और उनके पूर्वकृत पापकर्म को याद दिलाकर उनसे वैष्णव- यज्ञ का अनुष्ठान करने के लिये कहना, उस यज्ञ को पूर्ण करके इन्द्र का स्वर्ग लोक में जाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.30.19 
अमरेन्द्र मया बुद्धॺा प्रजा: सृष्टास्तथा प्रभो।
एकवर्णा: समाभाषा एकरूपाश्च सर्वश:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! देवताओं के राजा! मैंने अपनी बुद्धि से पहले जो प्राणी उत्पन्न किए थे, उनके शरीर का रंग, भाषा, रूप और अवस्था सब एक जैसे ही थे॥19॥
 
O Lord! King of the Gods! The creatures that I had created earlier with my wisdom, their body colour, language, form and condition were all the same.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)