श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 30: ब्रह्माजी का इन्द्रजित को वरदान देकर इन्द्र को उसकी कैद से छुड़ाना और उनके पूर्वकृत पापकर्म को याद दिलाकर उनसे वैष्णव- यज्ञ का अनुष्ठान करने के लिये कहना, उस यज्ञ को पूर्ण करके इन्द्र का स्वर्ग लोक में जाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.30.1 
जिते महेन्द्रेऽतिबले रावणस्य सुतेन वै।
प्रजापतिं पुरस्कृत्य ययुर्लङ्कां सुरास्तदा॥ १॥
 
 
अनुवाद
जब रावण का पुत्र मेघनाद अत्यंत बलवान इन्द्र को हराकर अपने नगर ले गया, तब प्रजापति ब्रह्माजी को आगे करके सब देवता लंका पहुँचे॥1॥
 
When Ravana's son Meghnad defeated the very powerful Indra and took him to his city, then all the gods reached Lanka with Prajapati Brahmaji in front. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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