Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.3.36: देवता और गंधर्व उसकी स्तुति करते थे। उसका भव्य महल अप्सराओं के नृत्य से सुशोभित था। धनवान कुबेर सूर्य की किरणों की तरह सर्वत्र प्रकाश फैलाते हुए अपने पिता के पास गए। | ramayan सर्ग 7.3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स देवगन्धर्वगणैरभिष्टुत-
स्तथाप्सरोनृत्यविभूषितालय:।
गभस्तिभि: सूर्य इवावभासयन्
पितु: समीपं प्रययौ स वित्तप:॥ ३६॥
अनुवाद
देवता और गंधर्व उसकी स्तुति करते थे। उसका भव्य महल अप्सराओं के नृत्य से सुशोभित था। धनवान कुबेर सूर्य की किरणों की तरह सर्वत्र प्रकाश फैलाते हुए अपने पिता के पास गए।
The gods and Gandharvas used to praise him. His magnificent palace was decorated with the dance of Apsaras. The wealthy Kubera went to his father spreading light everywhere like the Sun with its rays.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे तृतीय: सर्ग: ॥ ३ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें तीसरा सर्ग पूरा हुआ ॥ ३ ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥