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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.3.32 
एतच्छ्रुत्वा स धर्मात्मा धर्मिष्ठं वचनं पितु:।
निवासयामास तदा लङ्कां पर्वतमूर्धनि॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
अपने पिता के इन धर्मयुक्त वचनों को सुनकर पुण्यात्मा वैश्रवण ने त्रिकूट पर्वत की चोटी पर बनी लंकापुरी में निवास किया।
 
After listening to these righteous words of his father, the virtuous Vaishravana took up residence in Lankapuri, built on the peak of the Trikuta mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)