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ramayan 7.3.31: ‘अतः हे पुत्र! तुम वहाँ जाकर सुखपूर्वक रहो। वहाँ रहने में कोई कष्ट या परेशानी नहीं है। वहाँ कोई भी बाधा नहीं डाल सकता।’॥31॥   |   ramayan सर्ग 7.3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 3: राक्षस वंश का वर्णन - हेति, विद्युत्केश और सुकेश की उत्पत्ति  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.3.31 
स त्वं तत्र निवासाय गच्छ पुत्र यथासुखम्।
निर्दोषस्तत्र ते वासो न बाधस्तत्र कस्यचित्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
‘अतः हे पुत्र! तुम वहाँ जाकर सुखपूर्वक रहो। वहाँ रहने में कोई कष्ट या परेशानी नहीं है। वहाँ कोई भी बाधा नहीं डाल सकता।’॥31॥
 
‘Therefore, son! You may go there to live happily. There is no problem or trouble in living there. No one can create any hindrance there.’॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)