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श्लोक 7.29.6  |
क्रोधात् सूतं च दुर्धर्ष: स्यन्दनस्थमुवाच ह।
परसैन्यस्य मध्येन यावदन्तो नयस्व माम्॥ ६॥ |
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| अनुवाद |
| रथ पर बैठे हुए उस अजेय राक्षस ने क्रोधित होकर अपने सारथि से कहा - 'सूत! मुझे इस शत्रु सेना के मध्य से होते हुए इस सेना के अंत तक ले चलो ॥6॥ |
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| That invincible demon sitting on the chariot angrily said to his charioteer - 'Suta! Take me through the centre of this enemy army till the end of this army. ॥ 6॥ |
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