श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का देवसेना के बीच से होकर निकलना, देवताओं का उसे कैद करने के लिये प्रयत्न, मेघनाद का माया द्वारा इन्द्र को बन्दी बनाना तथा विजयी होकर सेना सहित लङ्का को लौटना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.29.6 
क्रोधात् सूतं च दुर्धर्ष: स्यन्दनस्थमुवाच ह।
परसैन्यस्य मध्येन यावदन्तो नयस्व माम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
रथ पर बैठे हुए उस अजेय राक्षस ने क्रोधित होकर अपने सारथि से कहा - 'सूत! मुझे इस शत्रु सेना के मध्य से होते हुए इस सेना के अंत तक ले चलो ॥6॥
 
That invincible demon sitting on the chariot angrily said to his charioteer - 'Suta! Take me through the centre of this enemy army till the end of this army. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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