श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का देवसेना के बीच से होकर निकलना, देवताओं का उसे कैद करने के लिये प्रयत्न, मेघनाद का माया द्वारा इन्द्र को बन्दी बनाना तथा विजयी होकर सेना सहित लङ्का को लौटना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.29.36 
अयं हि सुरसैन्यस्य त्रैलोक्यस्य च य: प्रभु:।
स गृहीतो देवबलाद् भग्नदर्पा: सुरा: कृता:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
मैंने देवताओं की सेना को तथा देवताओं की सेना में से तीनों लोकों के स्वामी इन्द्र को भी बंदी बना लिया है। ऐसा करके मैंने देवताओं का गर्व चूर-चूर कर दिया है॥36॥
 
I have captured the army of the gods and Indra, the lord of the three worlds, from among the army of the gods. By doing this I have shattered the pride of the gods. ॥ 36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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