श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का देवसेना के बीच से होकर निकलना, देवताओं का उसे कैद करने के लिये प्रयत्न, मेघनाद का माया द्वारा इन्द्र को बन्दी बनाना तथा विजयी होकर सेना सहित लङ्का को लौटना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.29.33 
रावणस्तु समासाद्य आदित्यांश्च वसूंस्तदा।
न शशाक स संग्रामे योद्धुं शत्रुभिरर्दित:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जब रावण का सामना आदित्यों और वसुओं से हुआ, तब वह युद्ध में उनके सामने खड़ा न हो सका; क्योंकि शत्रुओं ने उसे बहुत कष्ट दिया था ॥33॥
 
When Ravana encountered the Adityas and the Vasus, he could not stand before them in the battle; for the enemies had troubled him greatly. ॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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