श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का देवसेना के बीच से होकर निकलना, देवताओं का उसे कैद करने के लिये प्रयत्न, मेघनाद का माया द्वारा इन्द्र को बन्दी बनाना तथा विजयी होकर सेना सहित लङ्का को लौटना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.29.31 
दृश्यते न स मायावी शक्रजित् समितिंजय:।
विद्यावानपि येनेन्द्रो माययापहृतो बलात्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
यह युद्धविजयी मायावी दैत्य स्वयं दिखाई नहीं देता, इसीलिए इसने इन्द्र को जीतने में सफलता प्राप्त कर ली है। यद्यपि देवराज इन्द्र दैत्य माया को मारने की कला जानते हैं, तथापि इस दैत्य ने माया के द्वारा उनका बलपूर्वक अपहरण कर लिया है। 31॥
 
This battle-winning illusive demon himself is not visible, that is why he has succeeded in conquering Indra. Although Devraj Indra knows the art of killing the demon Maya, yet this demon has forcefully abducted him through Maya. 31॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd