श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का देवसेना के बीच से होकर निकलना, देवताओं का उसे कैद करने के लिये प्रयत्न, मेघनाद का माया द्वारा इन्द्र को बन्दी बनाना तथा विजयी होकर सेना सहित लङ्का को लौटना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.29.30 
तं तु दृष्ट्वा बलात् तेन नीयमानं महारणात्।
महेन्द्रममरा: सर्वे किं नु स्यादित्यचिन्तयन्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
मेघनाद द्वारा महेन्द्र को उस महासमर से बलपूर्वक ले जाते देख, समस्त देवता सोचने लगे कि अब क्या होगा ॥30॥
 
Seeing Mahendra being forcibly taken away from that great battle by Meghnad, all the gods began to wonder what would happen next.॥ 30॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd