श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का देवसेना के बीच से होकर निकलना, देवताओं का उसे कैद करने के लिये प्रयत्न, मेघनाद का माया द्वारा इन्द्र को बन्दी बनाना तथा विजयी होकर सेना सहित लङ्का को लौटना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.29.16 
यथा बलौ निरुद्धे च त्रैलोक्यं भुज्यते मया।
एवमेतस्य पापस्य निरोधो मम रोचते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जैसे राजा बलि के पकड़े जाने पर ही मैं तीनों लोकों का राज्य भोग रहा हूँ, वैसे ही यदि यह पापी राक्षस भी पकड़ा जाए तो मुझे स्वीकार्य है।॥16॥
 
Just as I am enjoying the kingdom of the three worlds only after King Bali is captured, similarly it is acceptable to me if this sinful demon is captured.'॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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