श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का देवसेना के बीच से होकर निकलना, देवताओं का उसे कैद करने के लिये प्रयत्न, मेघनाद का माया द्वारा इन्द्र को बन्दी बनाना तथा विजयी होकर सेना सहित लङ्का को लौटना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.29.11 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा तुरगान् स मनोजवान्।
आदिदेशाथ शत्रूणां मध्येनैव च सारथि:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
रावण के ये वचन सुनकर सारथि ने मन के समान वेगवान घोड़ों को शत्रु सेना में दौड़ा दिया।
 
On hearing these words of Ravana, the charioteer drove the horses, which were as swift as the mind, through the enemy army.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd