श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का देवसेना के बीच से होकर निकलना, देवताओं का उसे कैद करने के लिये प्रयत्न, मेघनाद का माया द्वारा इन्द्र को बन्दी बनाना तथा विजयी होकर सेना सहित लङ्का को लौटना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.29.10 
अयं स नन्दनोद्देशो यत्र वर्तावहे वयम्।
नय मामद्य तत्र त्वमुदयो यत्र पर्वत:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यह नंदनवन क्षेत्र है, जहाँ हम दोनों इस समय उपस्थित हैं। देवताओं की सेना यहीं से प्रस्थान करती है। अब आप मुझे उदयाचल स्थान पर ले चलें (देवताओं की सेना नंदनवन से उदयाचल तक फैली हुई है)॥10॥
 
‘This is the region of Nandanvan, where we both are present at this moment. The army of the gods starts from here. Now you take me to the place where Udayaachal is (the army of the gods is spread from Nandanvan to Udayaachal)’॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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