श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 28: मेघनाद और जयन्त का युद्ध, पुलोमा का जयन्त को अन्यत्र ले जाना, देवराज इन्द्र का युद्ध भूमि में पदार्पण, रुद्रों तथा मरुद्गणों द्वारा राक्षस सेना का संहार और इन्द्र तथा रावण का युद्ध  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.28.44 
एतस्मिन्नन्तरे क्रुद्धो दशग्रीव: प्रतापवान्।
निरीक्ष्य तु बलं सर्वं दैवतैर्विनिपातितम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
उधर जब महाबली दशग्रीव ने देखा कि देवताओं ने उसके सब सैनिकों को मार डाला है, तब उसके क्रोध की सीमा न रही ॥ 44॥
 
Meanwhile, when the mighty Daśagriva saw that the Gods had killed all his soldiers, his anger knew no bounds. ॥ 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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