श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 28: मेघनाद और जयन्त का युद्ध, पुलोमा का जयन्त को अन्यत्र ले जाना, देवराज इन्द्र का युद्ध भूमि में पदार्पण, रुद्रों तथा मरुद्गणों द्वारा राक्षस सेना का संहार और इन्द्र तथा रावण का युद्ध  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.28.34 
कुम्भकर्णस्तु दुष्टात्मा नानाप्रहरणोद्यत:।
नाज्ञायत तदा राजन् युद्धं केनाभ्यपद्यत॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
राजा! नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित होकर दुष्टात्मा कुम्भकर्ण न जाने किन लोगों से युद्ध कर रहा था (अर्थात् मतवाला होकर अपने तथा पराये सैनिकों से भी युद्ध कर रहा था)॥34॥
 
King! It was not known with whom the evil-spirited Kumbhakarna was fighting with, armed with various kinds of weapons (i.e. being inebriated, he used to fight with his own as well as strangers' soldiers).॥ 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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