श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 28: मेघनाद और जयन्त का युद्ध, पुलोमा का जयन्त को अन्यत्र ले जाना, देवराज इन्द्र का युद्ध भूमि में पदार्पण, रुद्रों तथा मरुद्गणों द्वारा राक्षस सेना का संहार और इन्द्र तथा रावण का युद्ध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.28.14 
शतघ्नीमुसलप्रासगदाखड्गपरश्वधान्।
महान्ति गिरिशृङ्गाणि पातयामास रावणि:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उसने कुल्हाड़ी, मूसल, भाले, गदा, तलवारें और कुल्हाड़ियाँ फेंकीं, यहाँ तक कि बड़े-बड़े पर्वत शिखरों को भी हिला दिया॥14॥
 
He threw down axes, pestles, spears, maces, swords and axes, and even moved huge mountain peaks.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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