vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 28: मेघनाद और जयन्त का युद्ध, पुलोमा का जयन्त को अन्यत्र ले जाना, देवराज इन्द्र का युद्ध भूमि में पदार्पण, रुद्रों तथा मरुद्गणों द्वारा राक्षस सेना का संहार और इन्द्र तथा रावण का युद्ध
»
श्लोक 11
श्लोक
7.28.11
शचीसुतश्चापि तथा जयन्तस्तस्य सारथिम्।
तं चापि रावणि: क्रुद्ध: समन्तात् प्रत्यविध्यत॥ ११॥
अनुवाद
शचीपुत्र जयंत ने मेघनाद के सारथि को भी घायल कर दिया। तब क्रोधित मेघनाद ने भी जयंत को चारों ओर से घायल कर दिया। 11.
Shachiputra Jayant also injured Meghnad's charioteer. Then an enraged Meghnad also injured Jayant from all sides. 11.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×