श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 27: सेना सहित रावण का इन्द्रलोक पर आक्रमण, इन्द्र की भगवान् विष्णु से सहायता के लिये प्रार्थना, भविष्य में रावण वध की प्रतिज्ञा करके विष्णु का इन्द्र को लौटाना, देवताओं और राक्षसों का युद्ध तथा वसु के द्वारा सुमाली का वध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.27.2 
तस्य राक्षससैन्यस्य समन्तादुपयास्यत:।
देवलोके बभौ शब्दो भिद्यमानार्णवोपम:॥ २॥
 
 
अनुवाद
स्वर्गलोक में सब ओर से आती हुई राक्षस सेना का कोलाहल ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो समुद्र मंथन की ध्वनि सुनाई दे रही हो ॥2॥
 
The noise of the demon army coming from all directions in the heavenly world seemed as if the sound of the churning of the ocean was being heard. ॥2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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