श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 26: रावण का रम्भा पर बलात्कार करना और नलकूबर का रावण को भयंकर शाप देना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.26.29 
अन्येभ्योऽपि त्वया रक्ष्या प्राप्नुयां धर्षणं यदि।
तद्धर्मत: स्नुषा तेऽहं तत्त्वमेतद् ब्रवीमि ते॥ २९॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई अन्य पुरुष मेरा अपमान करने पर तुला हुआ हो, तो आप उनसे भी मेरी रक्षा करें। मैं धर्म से आपकी पुत्रवधू हूँ - आपसे सत्य कहती हूँ।॥29॥
 
If any other man is bent upon insulting me, then you should protect me from them also. I am your daughter-in-law by religion - I am telling you the truth.'॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)