श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 26: रावण का रम्भा पर बलात्कार करना और नलकूबर का रावण को भयंकर शाप देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.26.22 
त्वदाननरसस्याद्य पद्मोत्पलसुगन्धिन:।
सुधामृतरसस्येव कोऽद्य तृप्तिं गमिष्यति॥ २२॥
 
 
अनुवाद
कमल और कुमुद की सुगन्धि से युक्त आपके इस सुन्दर मुख का रस स्वयं अमृत है। इस रस को चखकर आज कौन तृप्त होगा?॥ 22॥
 
The nectar of this beautiful face of yours which bears the fragrance of lotus and water lily is the nectar of nectar itself. Who will be satisfied today by tasting this nectar?॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)