श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  7.25.52 
तत: कैलासमासाद्य शैलं वैश्रवणालयम्।
राक्षसेन्द्रो महेन्द्राभ: सेनामुपनिवेशयत्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
मधुपुर से चलकर महेन्द्र के समान शक्तिशाली राक्षसराज रावण सायंकाल तक कुबेर के निवास कैलाश पर्वत पर पहुँच गया। उसने अपनी सेना को वहीं पड़ाव डालने का निश्चय किया।
 
After travelling from Madhupur, the demon king Ravana, who was as powerful as Mahendra, reached Mount Kailash, the abode of Kubera, by evening. He decided to camp his army there. 52.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे पञ्चविंश: सर्ग: ॥ २ ५॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आ र्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें पचीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ २ ५॥
 
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