श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना  »  श्लोक 22-24
 
 
श्लोक  7.25.22-24 
मातामहस्य योऽस्माकं ज्येष्ठो भ्राता सुमालिन:।
माल्यवानिति विख्यातो वृद्ध: प्राज्ञो निशाचर:॥ २२॥
पिता ज्येष्ठो जनन्या नो ह्यस्माकं चार्यकोऽभवत्।
तस्य कुम्भीनसी नाम दुहितुर्दुहिताभवत्॥ २३॥
मातृष्वसुरथास्माकं सा च कन्यानलोद्भवा।
भवत्यस्माकमेवैषा भ्रातॄणां धर्मत: स्वसा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हमारे नाना सुमाली के बड़े भाई, जो माल्यवान नाम से प्रसिद्ध हैं, बुद्धिमान और महान रात्रिचर हैं, हमारी माता कैकसी के मामा हैं। अतः वे हमारे नाना भी हैं। उनकी पुत्री अनला हमारी मौसी हैं। कुंभिनसी उनकी पुत्री हैं। हमारी मौसी अनला की पुत्री होने के कारण यह कुंभिनसी हम सब भाइयों की धर्मबहन हैं।॥ 22-24॥
 
‘The elder brother of our maternal grandfather Sumali, who is famous by the name of Malyavan, who is intelligent and a great night-walker, is the uncle of our mother Kaikasi. Hence, he is our maternal grandfather as well. His daughter Anala is our maternal aunt. Kumbhinaasi is her daughter. Being the daughter of our maternal aunt Anala, this Kumbhinaasi is the religious sister of all of us brothers.॥ 22-24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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