श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.25.12 
अक्षयाविषुधी बाणैश्चापं चापि सुदुर्जयम्।
अस्त्रं च बलवद् राजन् शत्रुविध्वंसनं रणे॥ १२॥
 
 
अनुवाद
राजन! बाणों से भरे हुए दो अक्षय तरकश, एक अटूट धनुष और रणभूमि में शत्रुओं का नाश करने में समर्थ एक प्रबल अस्त्र- ये सब प्राप्त हो गए हैं। 12॥
 
King! Two inexhaustible quivers full of arrows, an unbreakable bow and a powerful weapon capable of destroying the enemy in the battlefield – all these have been attained. 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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