श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.24.5 
ताभि: सर्वानवद्याभिर्नदीभिरिव सागर:।
आपूरितं विमानं तद् भयशोकाशिवाश्रुभि:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जैसे नदियाँ समुद्र को भर देती हैं, उसी प्रकार उन सभी सुन्दरी स्त्रियों ने भय और शोक से उत्पन्न अपने अशुभ आँसुओं से उस विमान को भर दिया॥5॥
 
Just as rivers fill the ocean, similarly all those beautiful ladies filled that plane with their ominous tears born out of fear and grief. ॥5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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