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श्लोक 7.24.40-42  |
एवमुक्त्वा दशग्रीव: सैन्यमस्यादिदेश ह॥ ४०॥
चतुर्दश सहस्राणि रक्षसां वीर्यशालिनाम्।
स तै: परिवृत: सर्वै राक्षसैर्घोरदर्शनै:॥ ४१॥
आगच्छत खर: शीघ्रं दण्डकानकुतोभय:।
स तत्र कारयामास राज्यं निहतकण्टकम्।
सा च शूर्पणखा तत्र न्यवसद् दण्डके वने॥ ४२॥ |
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| अनुवाद |
| यह कहकर दशग्रीव ने चौदह हज़ार पराक्रमी राक्षसों की सेना को खर के साथ जाने का आदेश दिया। उन भयंकर राक्षसों से घिरा खर शीघ्र ही दण्डकारण्य पहुँच गया और वहाँ निर्भय होकर निर्विघ्न राज्य भोगने लगा। उसके साथ शूर्पणखा भी वहीं दण्डक वन में रहने लगी। |
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| Saying this, Dashagriva ordered an army of fourteen thousand valiant demons to go with Khar. Surrounded by those fierce demons, Khar soon reached Dandakaranya and fearlessly started enjoying the uninterrupted kingdom there. Along with him, Shurpanakha also started living there in the Dandaka forest. |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे चतुर्विंश: सर्ग:॥ २४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें चौबीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ २४॥ |
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