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श्लोक 7.24.35  |
तेनासौ निहत: संख्ये मया भर्ता तव स्वस:।
अस्मिन् काले तु यत् प्राप्तं तत् करिष्यामि ते हितम्॥ ३५॥ |
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| अनुवाद |
| ‘बहन! इसी कारण युद्ध में तुम्हारे पति मेरे हाथों मारे गए। अब मुझे जो कर्तव्य मिला है, उसके अनुसार मैं सदैव तुम्हारे कल्याण के लिए कार्य करूँगा। ॥35॥ |
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| ‘Sister! This is the reason why your husband was killed by me in the war. Now, according to the duty that I have been given, I will always work for your welfare. ॥ 35॥ |
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