श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.24.35 
तेनासौ निहत: संख्ये मया भर्ता तव स्वस:।
अस्मिन् काले तु यत् प्राप्तं तत् करिष्यामि ते हितम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
‘बहन! इसी कारण युद्ध में तुम्हारे पति मेरे हाथों मारे गए। अब मुझे जो कर्तव्य मिला है, उसके अनुसार मैं सदैव तुम्हारे कल्याण के लिए कार्य करूँगा। ॥35॥
 
‘Sister! This is the reason why your husband was killed by me in the war. Now, according to the duty that I have been given, I will always work for your welfare. ॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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