श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.24.25-26h 
तां स्वसारं समुत्थाप्य रावण: परिसान्त्वयन्॥ २५॥
अब्रवीत् किमिदं भद्रे वक्तुकामासि मां द्रुतम्।
 
 
अनुवाद
रावण ने अपनी बहन को उठाकर उसे सांत्वना दी और पूछा, 'हे देवी! तुम मुझसे इतनी जल्दी क्या कहना चाहती थीं?'॥25 1/2॥
 
Ravana consoled his sister after lifting her up and asked her, 'Dear lady! What was it that you wanted to tell me so quickly?'॥ 25 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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