श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  7.24.13-14h 
कथं नु खलु मे पुत्रो भविष्यति मया विना॥ १३॥
कथं माता कथं भ्राता निमग्ना: शोकसागरे।
 
 
अनुवाद
हाय! मेरा छोटा बेटा मेरे बिना कैसे रहेगा? मेरी माँ की क्या हालत होगी और मेरे भाई कितने चिंतित होंगे?' ऐसा कहते-कहते वह शोक के सागर में डूब जाती।
 
Alas! How will my little son live without me? What will be the condition of my mother and how worried my brothers will be.' Saying this she would drown in the ocean of grief.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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