श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  7.23.52 
तत् किं तव यथा वीर परिश्रम्य गते नृपे।
ये तु संनिहिता वीरा: कुमारास्ते पराजिता:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
वीर! राजा वरुण के चले जाने के बाद यहाँ युद्ध के लिए व्यर्थ प्रयत्न करने से क्या लाभ? यहाँ उपस्थित उनके वीर पुत्र तो पहले ही तुमसे पराजित हो चुके हैं।'
 
Valiant! What is the use of making futile efforts for the war here after the departure of King Varuna? His brave sons who were present here have already been defeated by you.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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