श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.23.5 
स तु भोगवतीं गत्वा पुरीं वासुकिपालिताम्।
कृत्वा नागान् वशे हृष्टो ययौ मणिमयीं पुरीम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
नागों के राजा वासुकि द्वारा पोषित भोगवती नगरी में प्रवेश करके उन्होंने नागों को अपने वश में कर लिया और वहाँ से प्रसन्नतापूर्वक मणिमयी नगरी को प्रस्थान किया॥5॥
 
Entering the city of Bhogavati, which was nourished by the king of serpents Vasuki, he brought the serpents under his control and from there happily departed for the city of Manimayi.॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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