अपविद्धास्तु ते वीरा विनिष्पेतु: पदातय:॥ ४५॥
ततस्तेनैव सहसा सीदन्ति स्म पदातिन:।
महापङ्कमिवासाद्य कुञ्जरा: षष्टिहायना:॥ ४६॥
अनुवाद
उन अस्त्र-शस्त्रों से घायल होकर पैदल योद्धा पुनः युद्ध के लिए आगे बढ़े; किन्तु पैदल होने के कारण ही रावण के अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा से वे सहसा संकट में पड़ गये और भारी कीचड़ में फँसे हुए साठ वर्ष के वृद्ध हाथी के समान तड़पने लगे।
Wounded by those weapons, the warriors on foot once again advanced for the battle; but being on foot, they suddenly got into trouble due to Ravana's shower of weapons and started suffering like a sixty-year old elephant stuck in heavy mud.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥