श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  7.23.40 
ते तु त्यक्त्वा रथान् पुत्रा वरुणस्य महात्मन:।
आकाशे विष्ठिता: शूरा: स्वप्रभावान्न विव्यथु:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
महात्मा वरुण के वे वीर पुत्र अपने रथ छोड़कर अपनी ही शक्ति से आकाश में खड़े हो गए। उन्हें किसी प्रकार की पीड़ा नहीं हुई ॥40॥
 
Those valiant sons of the great soul Varuna left their chariots and stood up in the sky by their own power. They did not feel any pain at all. ॥ 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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